गम ए इशक शायरी

गम ए इशक शायरी

गम ए इशक शायरी

गम ए इश्क का मारा हूं मुझे ना छेड़ो ए दोस्तों

जुबान खुलेगी तो लब्जों सें लहू टपकेगा ए दोस्तों

 

जाने ऐसी भी क्या दिल लगी रही तुमसें

आखरी सांस में भी मैंने तुम्हारी ही ख़ुशी मांगी ||

 

मुकाम ए महोब्बत तुमने समझा ही नहीं

जहां तक  तेरा साथ वहीँ तक मेरी जिंदगी चली ||

 

डर  लगता है इन नींदों सें जो हसींन उनके ख़्वाब दिखाती  है

कहीं ये दिल हमेशा के लिए सोने की जिद ना कर बैठे

ए सनम कहीं तेरे पीछे ये जिंदगी ही ना लुटा बैठें  ||

 

जिस्म की दरारों सें रूह नजर आने लगी

हर पल हर घडी तेरी याद सताने लगी

बहूत अंदर तक तोड़ गया तेरा इश्क मुझे

अब कैसे दिलाऊं मैं ये अहसास तुझे ||

 

काश की बचपन में ही तुम्हे मांग लेते

हर चीज मिल जाती थी 2 आंसू बहाने सें

बीत गए है वो पल अब क्या  हो पछताने सें

वीरान हो  गई मेरी जिंदगी बस एक तेरे चले जाने सें  ||

 

कहते है महोब्बत नाम है जिसका वो एक ऐसी कैद है

पूरी उम्र बीत जाती है मगर सजा पूरी नहीं होती

 

हमारे बाद  नहीं आयेगा तुम्हे चाहत का मजा

तुम लोगों सें कहते फिरोगे मुझे चाहों उसकी तरह  ||

 

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गम ए इशक शायरी

 

तेरे बिना इस चमन का रंग फीका लगता है

एक तेरा ही रंग है जो कभी ना उड़ता है

खुशबू है तुझमें फूलों की अनमोल ताजगी है

तुझे देख देख आजकल कलियों का दिल जलता  है ||

 

हवाओं में तेरी खुशबू आ गई जो तुझसें मिलके आई

फिजाओं में बहार छा गई जो तूं मुस्कुराई

तेरे आंचल ने समेट ली सारी दुनिया की खुशबू

एक तेरे मिलन सें अजब सी खुशबू छाई  ||

गम ए इशक शायरी

इस गुलाब सें  सुन्दर मुखड़े पर मेरी नजर न  रुक जाए

मेरा दिल मेरे बस में नहीं कहीं प्यार ना हो  जाए

तूं माफ़ करना जो कोई खता हो जाये

या तेरी महोब्बत में दिल तेरा हो जाए  ||

 

हुसन आपका देखकर क्या क्या खयाल आता है

मिलती जब नजर आपसें बस   एक ही सवाल उठता है

रुकिए एक पल मेरी भी सुनिए

कहिये आपका क्या इरादा है

हमें तो बस आप पे प्यार आता है  ||

 

कितनी देर करदी  आपने नजर को उठाने में

क्या भूल हो गई  मेरी आपसें दिल लगाने में

आपने कुछ कह नहीं पाया आपको इतना खामोश देखकर

लगा जुदा हो जायेंगे उठा तेरा रूप देखकर  ||

गम ए इशक शायरी

क्या बात थी तुझमे तुझे देखा तो होश  गवा दिया

जिससे तूं मिली उसे अपना बना लिया

मैं भी दर बदर फिरता था दीवानों की तरह

एक तेरी चाहत ने मुझे शायर बना दिया ||

 

सुबह की धुप जैसी है तेरी ये जवानी

दिल को राहत देती जो लाती होंटों पर पानी

पहले पहले भुलाकर गम मस्ती भर जाती है

दोपहर को दिल जलाती है और शाम होते होते चली जाती है ||

 

बर्बाद उन्हें करती हो जो तुझे बर्बाद करते  है

दिल उन्हें देते हो जो तुझे छोड़ा करते है

कोई क्या जाने किसी के दिल में क्या होता है

दूर उनसें रहती हो जो तुम्हे दोस्त कहा करते हैं  ||

गम ए इशक शायरी

कैसे करूं उसका शुक्रिया जिसने तुम्हे बनाया

देखा जिधर उधर तेरा साथ पाया

सोचा न  था खुदा भी ऐसे रंग भरताहै

जिसने भी देखा तुझे बस तेरा हो गया  ||

 

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