जिस्म शायरी

जिस्म शायरी

जिस्म शायरी

जिस्म शायरी

तुम्हारा जिस्म कोई छीन ले मुझसे , मगर मेरा दिल तुम्हारा है ,
तुम अपना सब कुछ गैरो पे लुटाओ,ये सितम भी हमें प्यारा है ,
जहाँ तेरी जुस्तजू है ,तेरी मंजिल है , तेरी ख्वाहिश है , आरजू है ,
अपने हर ख्वाब को हमने उन्ही आइनों में तो संवारा है ||

 

अभी तुम दूर कहीं हो तो गुलिस्ता में बहार आनी बाकि है ,
तेरी सूरत पे छाए पर्दे को अपनी उंगलियों से उठाना बाकि है ,
तुम खामोश हो और हम खामोश है , इंतजार के आंसू लिए ,
तुझे महसूस कर भी नजरो से दीदार करना बाकि है ||

 

हम चिराग भी जलाते है आशियां में तेरा नूर समझकर ,
हम अश्क भी बहाते है बस तेरे कर्म का लहू समझकर ,
अपने हर सजदे में मेरी दुआओं ने तेरा नाम पुकारा है ,
अपने मस्जूद की तस्वीर में ऐ हुस्न हमने तुमको ही उतारा है ,
अब दिल को बस तेरा ही सहारा है ,बस तेरा ही सहारा है ||

—मेहन्दी के हाथ दिखाकर रोई –

अभी दर्द उठेगा तेरे आने से ,अभी सर्द हो जाएगी निगाहे ,
और एक आग तड़फ उठेगी सिने को जलाती हुई ,
तुम हथेलियों में हिज्र का चिराग  लेकर लेकर आओगी चुपके से ,
अपनी सुरत को लाल चुनर की घुंघट में हया से छुपाती हूँ ||

 

बस यूं ही छुपाते जाने से सुलझती है इश्क की उलझी राहे ,
तुम गुम सुम रहो , हम चुप रहे ,घुटती रहे दिल में कई आहे ,
जो तुम कह न सको ,हम सुन ले,यही आशिकी का जूनून है ,
तुम मेरे जिस्म में नहीं ,दिल में हो ,इसी में रूह को सुकून है ||

–निगाहों का कसूर –

आहे दिल की आरजू है ,दर्द की तमन्ना है ,
इश्क की गुनाह मेरा ,फिर सजा तो सहना है,
मुश्किलों के इस दौर में दूर है मेरी दिलरुबा ,
इसी तन्हाई में मेरे मुश्किलों को बढ़ना है ,
मेरी आंखो के दरवाजे खुलते है बस  तेरे लिए ,
लेकिन तेरे आशियां में गेरो को ही रहना है ,
लड़ जाऊंगा में दुनिया से लेकिन तू रुसवा होगी ,
दाग न तुझपे लगने देंगे,ज़माने से ही तो लड़ना है ||

 


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