तक़दीर का खेल

तक़दीर का खेल

तक़दीर का खेल

फर्क होता है खुदा और फ़क़ीर में,

फर्क होता है किस्मत और लकीर में

अगर कुछ चाहो और ना मिले तो समझ लेना

की कुछ और अच्छा लिखा है तक़दीर में,

प्यार की शायरी

आंखों में आंसुओं की लकीर बन गई,

जेसी चाहिए थी वेसी तक़दीर बन गई,

हमने तो बस रेत में उंगलियाँ घुमाई थी

देखा जो गौर सें तो आपकी तस्वीर बन गई ||

मां का दर्द

तक़दीर लिखने वाले एक अहसान लिख दे

मेरे दोस्त की तक़दीर में मुस्कान लिख दे

ना मिले जिंदगी में दर्द उसको

बदले में चाहे इसके तूं मेरी जान लिख दे  ||

तक़दीर का खेल—एक आशिक की कहानी

तेरी तक़दीर सें मेरी तक़दीर बना दें

मेरे हाथों में तूं अपनी लकीर बना दे

मैं रहूं ना रहूं तेरे पास बस

अपने दिल में मेरी तस्वीर बना ले ||

होठ पर शायरी

अपनी तक़दीर में तो कुछ ऐसे ही सिलसिले लिखे है

किसी ने वक्त गुजारने के लिए अपना बनाया

और किसी ने अपना बनाकर वक्त गुजार लिया ||

दीवानापन शायरी  —

लोगों सें कह दो हमारी तक़दीर सें जलना छोड़ दे

हम घर सें दवा नहीं माँ की दुआ लेकर निकलते है

कोई ना दे हमें खुश रहने की दुआ तो कोई बात नहीं

वैसे भी हम खुशियां रखते नहीं बांट दिया करते है ||

purpose शायरी

वो नजर कहां सें लाऊं जो तुझे भुला दें

वो  दवा कहां सें लाऊं जो इस दर्द को मिटा दे

मिलना तो लिखा होता है तकदीरों में

पर मैं वो तक़दीर कहां सें लाऊं जो हम दोनों को मिला दें ||

यादें शायरी

भले ही किसी गैर की जागीर थी वो ,

पर मेरे खवाबों की तस्वीर थी वो

वो मुझे मिलती भी तो कैसे मिलती

क्योंकि किसी और के हिस्से की तक़दीर थी वो ||

प्यार की शायरी

नहीं चाहिए हमें तख्तो ताज शायरों का

हम  जमीं पर ही बैठे अच्छे लगते हैं

कौन सुने यादों को लब्जों में

जिनके अहसास सें ही आंखों में आंसू आते हैं ||

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