माँ की याद में शायरी

माँ की याद में शायरी

माँ की याद में शायरी

माँ की याद में शायरी

हमारे कुछ गुनाहों की सजा भी साथ चलती है
अब हम कभी तन्हा नहीं चलते दवा भी साथ चलती है
अभी ज़िंदा है मां मेरी मुझे कुछ भी नहीं होगा
मैं जब भी अपने घर सें निकलता हूं मेरी मां की दुआ भी साथ चलती  है ||

*प्यार भरी शायरी*

कौन सी है जो चीज जो यहाँ नहीं मिलती
सब कुछ मिल जाता है लेकिन मां नहीं मिलती
माँ बाप ऐसे होते है दोस्तों जो जिंदगी में  फिर नहीं मिलते
दोस्तों खुश रखा करो माँ  – बाप को फिर देखो जन्नत कहां  नहीं मिलती ||

*प्रेम कहानियां*

बचों को खाना खिला कर जब सुला देती है मां
तब जाकर थोड़ा सा सुकून पाती है मां
प्यार कहते है किसे और ममता क्या चीज  है ?
कोई उन बच्चों से पूछे जिनकी गुजर जाती  है मां
चाहे हम खुशियों में मां को भूल जाएं

जब मुसीबत सर पे आती  है तो याद आती है मां ||
माँ की याद में शायरी
मां तेरे दूध का हक़ मुझसें अदा क्या होगा
अगर तूं है नाराज मुझसें तो खुश मुझसें वो खुदा क्या होगा||

 

किसी ने खुदा सें दुआ मांगी और दुआ में उसने अपनी ही मौत मांगी
खुदा ने मौत तो मैं तुझे दे देता पर तूं ही बता मैं उस मां को क्या जबाब दूं
जिसने मेरी चोखट पर बरसों सें तेरी लम्बी उम्र की दुआ  मांगी ||

माँ की याद में शायरी कुमार विश्वास की बेहतरीन शायरी

मैंने मां की हथेली पर एक काला तिल देखा और कहां मां  ये दोलत का तिल है
मां ने मेरे चेहरे को अपने दोनों हाथों में लिया और चुमते हुए कहा देख मेरे हाथों में कितनी दौलत है ||

*कविताएं*

मंजिल दूर और सफ़र बहूत है ,इस छोटी सी जिंदगी की फिकर बहूत है
मार ही डालती ये दुनिया कब का मुझे ,पर  मेरी मां की दुआओं में  असर बहूत है ||

*अनमोल विचार*

जिस दिन तुम्हारे कारण तुम्हारी मां के आंखों में आंसू आते है ,
याद रखना उस दिन तुम्हारा सारा किया धर्म आंसूओं में बह जाता है ||

*दर्द भरी शायरी*

जिस के होने सें मैं खुद को मुक्कमल मानता हूं ,
उस रब्ब के बाद बस मैं मेरी मां को जानता हूं ||

माँ की याद में शायरी

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