ये दौलत ये शौहरत मुझको अच्छी नहीं लगती

ये दौलत ये शौहरत मुझको अच्छी नहीं लगती

ये दौलत ये शौहरत मुझको अच्छी नहीं लगतीये दौलत ये शौहरत मुझको अच्छी नहीं लगती

Dear Friends, आज मैं आपके सामने लेकर आया हूं महेंदर तलवाड़ा द्वारा लिखी हुयी  प्रेम रस कविता  ये दौलत ये शौहरत मुझको अच्छी  नहीं लगती | अगर आपको हमारी ये रचना पसंद आये तो  आप इसे अपने दोस्तों और मित्रो सें सांझा  जरूर करें ताकि हम आपके लिए इसी तरह सें कविताये  और शेरो शायरी लेकर आते रहे

 

खोज अब तक है जारी जब सें तुझसें नजर फेरी

देख ली ये हसीं दुनिया ,नजर अब तक थी ठहरी

लाख समझाया दुनियां ने मगर मुझको ये  मालूम है

जरुररत है तुझे मेरी , जरूरत है मुझे तेरी  ||

|अकबर बीरबल कहानियां |      |प्रेम कहानियां |

ये दौलत ये शौहरत मुझको अच्छी नहीं लगती

अपने घर में भी रौनक मुझको अच्छी नहीं लगती

अच्छा लगता है दुनिया को जो भी आज करता हूं

मगर तेरे बिना कोई बात मुझे अच्छी नहीं लगती ||

इंतजार शायरी    गुड मॉर्निंग शायरी     दो लाइन शायरी

खुद सें दूर हो तुम भी खुद सें दूर है हम भी

बड़े मगरूर हो तुम भी बड़े मगरूर है हम भी

ना ना जाने क्या साबित करता है  खुदा तकलीफें देकर

बड़े मजबूर हो तुम भी बड़े मजबूर है हम भी ||

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|अकबर बीरबल कहानियां |      |प्रेम कहानियां |

ये दौलत ये शौहरत मुझको अच्छी नहीं लगती

अपने घर में भी रौनक मुझको अच्छी नहीं लगती

अच्छा लगता है दुनिया को जो भी आज करता हूं

मगर तेरे बिना कोई बात मुझे अच्छी नहीं लगती ||

इंतजार शायरी    गुड मॉर्निंग शायरी     दो लाइन शायरी

 

 

ना ना जाने क्या साबित करता है  खुदा तकलीफें देकर

बड़े मजबूर हो तुम भी बड़े मजबूर है हम भी ||

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