सब्र की इन्तहा

सब्र की इन्तहा

सब्र की इन्तहा

कदम कदम प्रीत बहार मिले

उम्र भर जिंदगी का प्यार मिले

खिलती रहे मुस्कान फूलों की तरह

हर ख़ुशी तुमको बार बार मिले ||

 

सांसे  बनकर साथ निभायेंगे

कोशिश रहेगी कभी ना सतायेंगे

पसंद ना आये हमारा साथ तो बता देना

कभी महसूस ही नहीं कर पाओगे इतना दूर चले जायेंगे ||

 

हर फूल खुशबूदार नहीं होता

हर पत्थर चमकदार नहीं होता

ए दोस्त  दोस्ती संभलकर करना

क्योंकि हर दोस्त वफादार नहीं होता ||

—हाथों की लकीरों में –

मत पूछ मेरे सब्र की इन्तहा कहां तक है

तूं सितम करले तेरी हद जहां तक है

वफा की उम्मीद जिसे होगी उसे होगी

हमें तो देखना ये है की तूं बेवफा कहां तक है ||

—7 Success secret—

बहूत तमन्ना थी किसी को अपना बनाने की

बहूत आरजू थी किसी का हो जाने की

पर हमें ये खबर कहा थी की जिसे हम अपना मानते है

उन्हें आदत ही नहीं थी किसी को अपना बनाने की  ||

—Good Morning –

इन आंखों में आंसुओं की लकीर बन गई

जेसी चाहिए थी वेसी तक़दीर बन गई

हमने तो यूँही फेरी थी रेत में उंगली

देखा जो गौर से तो आपकी तस्वीर बन गई ||

–निगाहों का कसूर –

आग दिल में लगी जब वो खफा हुए

महसूस हुआ तब जव वो  जुदा हुए

करके वफा वो कुछ दे ना सके

पर बहूत कुछ दे गए जब  वो  बेवफा हुए ||

–दर्द शायरी-

दिल सें दिल बड़ी मुश्किल सें मिलते है

तूफानों में साहिल बड़ी मुश्किल सें मिलते है

यूं तो मिल जाता है हर कोई

पर आप जैसे दोस्त नसीबों सें मिलते है ||

–मैं रहूं ना रहूं –

किस हद तक जाना है ये कौन जानता  है

किस मंजिल को पाना है ये कौन जानता है

दोस्ती के दो पल जी भर के जी लो

किस रोज बिछड़ जाना है ये कौन जानता है ||

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