Bhagat Singh per Shayari

Bhagat Singh per Shayari



Bhagat Singh per Shayari

गोरों का ये खेल क्यों हम खेले जा रहें है

आज वेलेनटाईन डे है हर तरफ ये चर्चा हो रहा है
अपने महबूब पर लाखों का खर्चा हो रहा है
गोरों का ये खेल क्यों हम खेले जा रहें है
शहीदों की कुर्बानी सें हम खेले जा रहे है
आज हम भूल उन वीरों को गोरों के पर्व मना रहें है
हम खुद उन वीरों की वीरता पर दाग लगा रहें है |

क्यों हम भूल गए आज के दिन ही
माँ भारती के तीन लालों को फांसी की सजा सुनाई थी
उन अँधेरी कोठरियों सें इन्कलाब जिंदाबाद की ही आवाजें आई थी
उस वक्त हर भारतीय ने उनकी ही गौरव गाथा गई थी
उनके बलिदानों सें हमने ये आजादी पाई थी ||

अरें बंद करो इन फ़ालतू के कामों को
क्यों बर्बाद करते हो अपनी शामों को
अपने खून सें जिगर पर लिख डालों उन शहीदों के नामों को
कुछ याद उन्हें भी करलो क्यों भूल रहे बलिदानों को ||

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